केंद्र सरकार असंगठित क्षेत्र के लिए कई अहम् फैसले लेने जा रही है, जिससे संगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों की आमदनी में वृद्धि हो सकती है। सरकार इस सप्ताह सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2019 (सोशल सिक्योरिटी कोड बिल 2019) में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को संसद में पेश कर सकती है, जिसके बाद चुनिंदा क्षेत्रों में कर्मचारी की सैलरी से ईपीएफ मद में कटने वाले 12 फीसद के अनिवार्य अंशदान घटाया जा सकता है।
इसके बाद कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी में थोड़ी वृद्धि हो सकती है, जबकि नियोक्ता का अंशदान 12 फीसद पर बना रहेगा। हालांकि सरकार के इस फैसले से रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के हाथ में आने वाली राशि में कमी आ जाएगी। आपको बता दें कि वर्तमान व्यवस्था में संगठित क्षेत्र में कर्मचारी और नियोक्ता ईपीएफ मद में हर माह मूल वेतन का 12-12 फीसद का अंशदान करते हैं, लेकिन यह नियम हर सेक्टर पर लागू नहीं होगा। एमएसएमई, वस्त्र और स्टार्टअप क्षेत्र की कंपनियां ही लाभ उठा सकेंगी। सूत्रों के मुताबिक सेक्टर के आधार पर ईपीएफओ में कर्मचारियों का अंशदान 9-12 फीसद के बीच रह सकता है। इस नए नियम से कर्मचारियों की टेक होम सैलरी बेहतर हो जाएगी।
पांच साल बाद आई है योजना
पांच सालों तक बनने के बाद यह योजना सामने आई है।कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं के अंशदान से हर साल ईपीएफओ के पास 1.3 ट्रिलियन रुपये जमा होते हैं। माना जा रहा है कि चुनिंदा सेक्टर्स में अंशदान में दो से तीन फीसद की कमी से हर साल खर्च के लिए 3,000 करोड़ रुपये की बचत होगी